स्थानीय सांसदों के दबाव के कारण शुरू किए गए 1250 स्टॉपेज पर अब ट्रेनें नहीं रूकेंगी। अतिरिक्त स्टॉपेज के कारण रेलवे को हर दिन 1 करोड़ रूपए का घाटा होता है। रेल मंत्रालय ने देश भर में 1250 स्टॉपेज को खत्म करने का फैसला किया है।रेल मंत्रालय ने संसद को बताया है कि स्टॉपेजेज की समीक्षा की जाएगी। एक समाचार पत्र की रिपोर्ट के मुताबिक अतिरिक्त स्टॉपेज को सितंबर तक खत्म कर दिया जाएगा। घाटे में चल रहे रेलवे ने रेल बजट के तहत आंतरिक सर्वे कराया था। इसमें पाया गया कि प्रत्येक अतिरिक्त स्टॉपेज के कारण ईंधन और अन्य खर्च करीब 8000 रूपए बैठता है। दूसरी ओर रेलवे को प्रत्येक अतिरिक्त स्टॉपेज से सिर्फ 500 रूपए की ही कमाई होती है। इस तरह रेलवे को सालाना 300 करोड़ रूपए का घाटा होता है।मंत्रालय के बुककीपर्स ने आधिकारिक रूप से ऐसे स्टॉपेज को साइलेंट किलर्स कहा है। बिहार और केरल को जोड़ने वाले ट्रेनों के लिंक पर सबसे ज्यादा ऐसे स्टॉपेज आते हैं। ऐसे कुल 2400 स्टॉपेज हैं। इनमें से 1250 स्टॉपेज व्यावसायिक रूप से अवांछित और अव्यावहारिक हैं। इन स्टॉपेज की शुरूआत उस वक्त हुई जब स्थानीय सांसदों ने जनता की मांग बताकर रेलवे को सिफारिश की थी। इनमें से ज्यादातर अब सांसद नहीं है।कई सांसद इस बात पर सहमत हैं कि अगर टिकटों की बिक्री पर वांछित प्रभाव नहीं पड़ रहा है तो उन्हें कैंसिल कर दिया जाए। रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि कई नेता अपने पसंदीदा स्टेशन पर ट्रेन को रूकवाने को प्रभाव से जोड़कर देखते हैं। जब उनके क्षेत्र के लिए रेल बजट में किसी ट्रेन या परियोजना की घोषणा नहीं होती है तो वे ट्रेनों के स्टॉपेज की मांग करते हैं।
Author: JAN TV Editorial Team
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