कोलेजियम सिस्‍टम के पक्ष में चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा, बोले-इसमें कोई गड़बड़ी नहीं
(DELHI, India) चीफ जस्टिस लोढ़ा ने कोलेजियम सिस्‍टम का बचाव करते हुए कहा कि कोलेजियम सिस्‍टम में कोई गड़बड़ी नहीं है। कोलेजियम सिस्‍टम फेल नहीं हुआ है। यदि यह सिस्‍टम गलत है तो हम भी गलत हैं। उन्‍होंने कहा कि जनता न्‍यायपालिका में भरोसा करती है और हमें इसका सम्‍मान करना चाहिए। इससे बहुत बड़ा नुकसान हो रहा है। मैं न्‍यायाधीशों के उन पहले बैच से हूं जो कोलेजियम सिस्‍टम के जरिये आए। सीजेआई ने यह भी कहा कि कोई पूर्ण नहीं है। सोसायटी भी परफेक्‍ट नहीं है और हम भी उसी समाज से आते हैं। लोढ़ा ने न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम को भंग करने की कोशिश पर नाराजगी जताई है। उन्‍होंने कहा कि जनता के भरोसे को न डिगाया जाए। हमें जनता के भरोसे को कायम रखना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि इस समय न्‍यायपालिका को बदनाम करने की साजिश चल रही है। गौर हो कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कोलेजियम सिस्‍टम रद्द करने की याचिका खारिज हो गई। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायाधीशों की नियुक्ति पर कॉलेजियम की सिफारिश को उसकी वेबसाइट पर सार्वजनिक करने की मांग करने वाली जनहित याचिका खारिज की। गौरतलब है कि सरकार न्यायाधीशों की नियुक्ति की मौजूदा कोलेजियम प्रणाली को खत्म करने के लिए इसी सत्र में विधेयक लाने की तैयारी में है। कोलेजियम की जगह नई व्यवस्था कैसी हो इसके विकल्पों पर विचार-विमर्श चल रहा है। कानून के कुछ विशेषज्ञों का मत है कि प्रस्तावित ज्यूडिशियल अप्वांटमेंट कमीशन (जेएसी) यानी न्यायिक नियुक्ति आयोग को एक स्थाई निकाय होना चाहिए जिसके अध्यक्ष और सदस्यों का एक निश्चित कार्यकाल हो। दूसरे मानते हैं कि इसका एक एक्स ऑफिसियो यानी पदेन निकाय रहना पर्याप्त है। इससे पहले की संप्रग सरकार ने अपने विधेयक में ऐसा ही प्रस्ताव दिया था। विधेयक पेश करने की तैयारी में जुटी सरकार के बारे में माना जा रहा है कि वह दोनों विकल्पों पर विचार कर रही है। स्थाई निकाय का मतलब है कि उसके अध्यक्ष और अन्य सदस्यों का एक पहले से निर्धारित कार्यकाल होगा, पदेन आयोग में इसके सदस्य अन्य पद पर रहते हुए इसका हिस्सा होंगे।

Author: JAN TV Editorial Team

DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।