कोलगेट और सीडब्ल्यूजी घोटालों से बड़े नाम हटाने के लिए यूपीए नेताओं ने बनाया था दबाव : पूर्व सीएजी
(DELHI, India) एक अंग्रेजी दैनिक से बातचीत में विनोद राय ने कहा, 'नेता मेरे घर आए और मुझे कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स और कोयला आवंटन की रिपोर्ट्स से जुड़े कुछ लोगों के नाम हटा दीजिए या उन्हें बचा लीजिए।' राय ने बताया कि 15 सितंबर को रिलीज होने जा रही किताब 'नॉट जस्ट ऐन अकाउंटेंट' में विस्तार से इस बात का उल्लेख किया गया है कि उस वक्त के पीएम मनमोहन सिंह के फैसलों से देश को कितना बड़ा नुकसान हुआ। राय ने कहा, 'पीएम की जिम्मेदारी काफी महत्वूर्ण होती और हर बड़े काम में आखिरी फैसला उन्हीं का होता है। मनमोहन सिंह ने कुछ मामलों में यह फैसला किया और कुछ में नहीं। लेकिन इतना तय है कि सरकार में जिन लोगों को सही वक्त पर सही फैसले लेने थे, उन्होंने ऐसा नहीं किया।' विनोद राय ने उन लोगों का नाम बताने से इनकार कर दिया, जिन्होंने उनपर लोगों के नाम हटाने के लिए दबाव डाला था। लेकिन उन्होंने कहा कि अपनी किताब में उन्होंने विस्तार से लिखा है कि किन हालात में कैसे-कैसे उनपर दबाव डाला गया और क्या-क्या कहा गया। उन्होंने बताया कि इस काम के लिए मेरे सहयोगी नौकशाह को भी मेरे पास भेजा गया। राय ने बताया कि उन्होंने सबसे ज्यादा दबाव तब महसूस किया, जब संसद की पीएसी की बैठकें चल रही थी। राय की यह किताब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल को लेकर आने वाली कई किताबों में से एक है। अभी तक पूर्व कोयला सचिव पीसी पारख, मनमोहन सिंह के अपने मीडिया सलाहकार संजय बारू और नेहरू-गांधी परिवार के करीबी रहे नटवर सिंह की किताबें भी कुछ ऐसे ही खुलासे कर चुकी हैं।

Author: JAN TV Editorial Team

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