(International)
2001 में तालिबान के पतन के बाद अफगानिस्तान पहले लोकतांत्रिक चुनाव के जरिए सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया में है। सुषमा स्वराज की अफगानिस्तान यात्रा इस लिहाज से भी काफी मायने रखती है कि यह ऐसे समय में हो रही है जब इस वर्ष के अंत तक नाटो बलों की वापसी के मद्देनजर देश में तालिबान और अल कायदा से जुड़े अन्य तत्वों के सिर उठाने की आशंकाए तेज हो रही हैं। अफगानिस्तान इस समय 14 जून को हुए राष्ट्रपति पद के चुनाव के बाद विवादास्पद दूसरे दौर के मतों की गिनती के परिणामों का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। मतों की गिनती का काम पहले ही पूरा हो चुका है और परिणाम अगले कुछ दिनों में घोषित किए जा सकते हैं। पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला अब्दुल्ला तथा पूर्व वित्त मंत्री अशरफ घानी का चुनाव में कड़ा मुकाबला है और दोनों में से जो भी विजेता होगा वह राष्ट्रपति हामिद करजई का उत्तराधिकारी बनेगा जो करीब 13 साल से सत्ता में हैं। विदेश मंत्री के रूप में अफगानिस्तान की अपनी पहली यात्रा के दौरान सुषमा कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मसलों पर करजई के साथ चर्चा करेंगी जिनमें भारत के साथ रक्षा और सुरक्षा सहायता को और अधिक मजबूती प्रदान करना भी शामिल है।
Author: JAN TV Editorial Team
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।