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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस मामले पर सुनवाई के दौरान कहा कि सीबीआई फाइल नोटिंग्स और निदेशक के आवास के रजिस्टर समेत सभी दस्तावेज विशेष सरकारी वकील को दिए जाएं। सुप्रीम कोर्ट गैर सरकारी संगठन की उस याचिका पर सुनवाई के लिए राजी हो गया है, जिसमें एनजीओ ने न्यायालय से अपने उस आदेश पर दोबारा गौर करने की अपील की थी जिसमें व्हिसलब्लोअर का नाम उजागर करने के निर्देश दिए गए थे। शीर्ष कोर्ट ने सीबीआई निदेशक की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि उनके खिलाफ दायर मामले की सुनवाई नहीं की जानी चाहिए और उसे खारिज कर दिया जाना चाहिए। विशेष सरकारी वकील की राय जाननी होगी क्योंकि हमारे किसी भी आदेश का असर 2जी मामलों पर होगा। गौर हो कि सीबीआई के निदेशक रंजीत सिन्हा पर 2जी स्पेट्रम और कोयला खदान आबंटन मामले के आरोपियों को बचाने का आरोप लगाने वाले गैर सरकारी संगठन ने बीते दिनों उच्चतम न्यायालय को उस व्हिसल ब्लोअर का नाम बताने से इनकार कर दिया था, जिसने निदेशक के खिलाफ दस्तावेज मुहैया कराये थे। इस संगठन का कहना है कि ऐसा करने से कई लोगों की जिंदगी को खतरा हो सकता है। गैर सरकारी संगठन पब्लिक इंटरेस्ट लिटीगेशंस ने सत्येन्द्र दुबे सहित कई व्हिसल ब्लोअर की हत्या की घटनाओं का हवाला देते हुये अपने हलफनामे में कहा है कि सूचना प्रदान करने वाले स्रोत की जानकारी देना सिर्फ विश्वासघात ही नहीं होगा बल्कि यह ऐसे व्यक्तियों की जान जोखिम में डालने वाला हो सकता है या फिर उनका शोषण हो सकता है। संगठन ने वकील प्रशांत भूषण के माध्यम से दाखिल हलफनामे में कहा है कि इस मामले की गतिविधियों के मद्देनजर संगठन के संचालक मंडल की बैठक 17 सितंबर को हुई थी। इस बैठक में सदस्यों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया कि स्रोत की पहचान का खुलासा नहीं किया जाएगा। हलफनामे में कहा गया है कि सिन्हा के खिलाफ आरोप सही है और सीबीआई के अपने रिकार्ड से इनकी आसानी से पुष्टि की जा सकती है। हलफनामे में कहा गया है कि न्यायालय इसके लिये 2जी मामले के विशेष लोक अभियोजक की मदद ले सकता है। हलफनामे के अनुसार, जहां तक आगंतुक रजिस्टर में मुलाकातों का सवाल है तो सीबीआई निदेशक के घर पर तैनात आईटीबीपी और सीबीआई के रक्षकों से पूछताछ करके इसकी पुष्टि की जा सकती है जिसकी सूची पहले ही न्यायालय को मूल प्रवेश रजिस्टर के साथ सौंपी जा चुकी है।
Author: JAN TV Editorial Team
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