(DELHI, India)
जिन कोल ब्लॉक्स के आबंटन को रद्द करने का फैसला सुनाया गया है, वह सभी निजी कंपनियों के हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 1993 के बाद से आवंटित 214 कोयला ब्लॉकों का आवंटन रद्द कर दिया है। न्यायालय ने गैरकानूनी घोषित 218 कोयला खदान में से चार का आवंटन रद्द नहीं किया है। वहीं, कोर्ट ने कोल ब्लॉक्स की नीलामी के लिए छह महीने के लिए वक्त दिया है। यानी 46 कोल ब्लॉक्स की अब दोबारा नीलामी की जाएगी। न्यायालय ने खानों के बारे में आज दोपहर दो बजे अपना निर्णय सुनाया। गौर हो कि न्यायालय ने इन खानों के आवंटन को अवैध करार दिया था। वहीं सरकार का दावा है कि इसमें 2 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। शीर्ष अदालत ने 25 अगस्त को दिये अपने आदेश में कहा था कि 1993 से केंद्र की विभिन्न सरकारों द्वारा आवंटित कोयला खानें अवैध और मनमाने तरीके से आवंटित किए गए। गौर हो कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने के शुरुआत में अपने फैसले में कहा था कि नीलामी व्यवस्था से पहले 1993 से 2010 के बीच राजग और संप्रग सरकारों द्वारा किए गए कोयला ब्लाकों के सभी आबंटन गैरकानूनी तरीके से 'तदर्थ और लापरवाही' के साथ तथा बगैर 'दिमाग लगाए' किए गए। कोर्ट की खंडपीठ ने 218 कोयला खदानों के आबंटन की जांच पड़ताल की और कहा था कि 'राष्ट्रीय संपदा के अनुचित तरीके से वितरण की प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता नहीं थी' जिसका खामियाजा लोकहित और जनहित को चुकाना पड़ा। वहीं, केंद्र सरकार ने कोयला खदानों के आबंटन के मामले में फैसला सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ दिया था। न्यायालय ने अपने फैसले में इन खदानों के आबंटन को गैरकानूनी घोषित किया था। सरकार ने इसके साथ ही न्यायालय से कहा था कि चालू वर्ष में पांच करोड़ टन कोयले का उत्पादन करने के लिये करीब 40 खदानों में उत्पादन हो रहा है और छह अन्य खदानें भी इसके लिये तैयार हैं। कोयला मंत्रालय ने इस संबंध में एक हलफनामा दाखिल किया है जिसमें अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी के एक मई के इन बयानों को भी शामिल किया कि न्यायालय द्वारा गैरकानूनी घोषित किये गये आबंटनों को रद्द किये जाने पर सरकार को ‘आपत्ति नहीं’ है।
Author: JAN TV Editorial Team
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