सेवानिवृत्त हो रहे जस्टिस आरएम लोढ़ा ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति की वर्तमान कोलेजियम व्यवस्था की तरफदारी की है। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति में न्यायाधीश ही सबसे बेहतर चयन कर सकते हैं क्योंकि उन्हें नियुक्त किए जाने वाले न्यायाधीश के बारे ज्यादा मालूम होता है। नियुक्ति में बाहरी व्यक्ति के शामिल होने से न्यायपालिका की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि ये उनके निजी विचार हैं और विचार सबके अलग भी हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि संसद ने उचित समझते हुए ही नया कानून पारित किया है। न्यायाधीश या मुख्य न्यायाधीश पद से सेवानिवृत्ति के बाद संवैधानिक या सरकारी पद ग्रहण करने पर चल रही बहस के बीच सीजेआइ लोढ़ा ने साफ कर दिया है कि वे सेवानिवृत्ति के बाद कोई संवैधानिक या सरकारी पद ग्रहण नहीं करेंगे। जस्टिस लोढ़ा आज सेवानिवृत्त हो जाएंगे।गौरतलब है कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश पी. सतशिवम को पिछले दिनों केरल का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति के बाद से सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के संवैधानिक या सरकारी पद ग्रहण करने पर बहस एक बार फिर ताजा हो गई थी।
Author: JAN TV Editorial Team
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।