सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को लगाई फटकार, पूछा- 'दिल्ली में कैसे बनेगी सरकार?'
(DELHI, India) केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान पूछा कि उसने लंबे समय के बाद भी अपना रुख सरकार गठन को लेकर साफ क्यों नहीं किया।कोर्ट ने सरकार गठन के संबंध में फैसला लेने में देरी के लिए केंद्र सरकार और दिल्ली के उप राज्यपाल की खिंचाई की। कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र में ,राष्ट्रपति शासन हमेशा नहीं रह सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उप राज्यपाल को सरकार गठन के संबंध में जल्द फैसला लेना चाहिए था और इसमें पांच महीने का समय नहीं लगना चाहिए था। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को फटकार लगाते हुए कहा कि दिल्ली में सरकार बनाने पर इतनी देरी क्यों हुई। केंद्र के जवाब पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा कि पहले यह सब क्यों नहीं हुआ। दिल्ली में सरकार के गठन को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज नहीं आएगा। केंद्र ने दिल्ली में एक साल तक के राष्ट्रपति शासन पर सुप्रीम कोर्ट की दखल को गैरजरूरी बताया है। गौर हो कि दिल्ली के उप राज्यपाल नजीब जंग ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से इजाजत मांगी थी। राष्ट्रपति की तरफ से उप राज्यपाल को हरी झंडी दे दी गई थी। सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दिल्ली में सरकार बनाने का न्योता बीजेपी को देने पर सहमति जताने की बात सामने आई थी। गौर हो कि एलजी ने राष्ट्रपति को भेजी अपनी रिपोर्ट में भी कहा था कि सबसे बड़ी पार्टी यानी बीजेपी को सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए। इन्हीं बातों की जानकारी केंद्र ने आज सुप्रीम कोर्ट को दी। फिलहाल 70 सीटों वाली दिल्ली विधानसभा में 67 विधायक हैं क्योंकि बीजेपी के 3 एमएलए सांसद बन चुके हैं। और इसपर उपचुनाव होना है। 67 विधायकों में बीजेपी के सबसे ज्यादा 29, विनोद कुमार बिन्नी के अलग होने के बाद आम आदमी पार्टी आप के 27, कांग्रेस के 8 और 3 निर्दलीय विधायक हैं। दिल्ली में इस वक्त राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है। राष्ट्रपति शासन की अवधि 16 फरवरी 2015 तक है।

Author: JAN TV Editorial Team

DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।