सार्वजनिक क्षेत्र के कई बड़े बैंकों ने अपने सावधि जमा दरों (टर्म डिपॉजिट रेट्स) में 100 बेसिक अंकों की कटौती की है। इसका कारण है कि क्रेडिट वृद्धि में सुस्त बनी हुई है और मुद्रा बाजार में तरलता में सुधार हुआ है और यह (100 बेसिक पॉइंट यानि की 1 प्रतिशत पॉइंट) बढ़ी है। जिन बैंकों ने हाल में डिपॉजिट दरों को घटाया है उनमें बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, आंध्रा बैंक शामिल हैं। जबकि एसबीआई. आईसीआईसीआई बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने इस महीने की शुरुआत में अपने रेट्स में परिवर्तन किया है। आंध्रा बैंक के चेयरमैन सीवीआर राजेंद्रन ने कहा, श्हम डिपॉजिट्स पर ब्याज दरों में कमी इसलिए कर पाए हैं क्योंकि सरकारी प्रतिभूतियों (सिक्यॉरिटीज) में हमारे पास सरप्लस निवेश हैं। इंटरेस्ट रेट्स में कमी की उम्मीद से बॉन्ड्स की कीमतों में सुधार हुआ और हम अपने निवेश पर लाभ पा सकते हैं। उन्होंने कहा कि आरबीआई दिसंबर में आने वाली अपने मॉनिटरी पॉलिसी में ब्याज दरों में कटौती का संकेत देगा। आरबीआई द्वारा 17 अक्टूबर को जारी डेटा के मुताबिक बैंक क्रेडिट ग्रोथ में सुधार आया है और यह अब 11 प्रतिशत हो गई है। लेकिन डिपॉजिट्स जिनमें 12.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हई है ने कमजोर ग्रोथ दर्ज की है। एक पखवाडे पहले बैंक क्रेडिट रेट 9.7 कमजोर ग्रोथ के साथ प्रतिशत पर था जबकि डिपॉजिट्स ग्रोथ 13.4 प्रतिशत ज्यादा थी। सेक्टोरियल डेटा के मुताबिक ज्यादातर बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ में पर्सनल सेगमेंट का योगदान ज्यादा है। साल-दर-साल पर आधारित 9 सितंबर के आकंड़ों के मुताबिक इंडस्ट्री के लिए बैंक क्रेडिट 6 प्रतिशत बढ़कर 142700 करोड़ रही। जबकि इसी अवधि के लिए पर्सनल लोन के लिए बैंक क्रेडिट 13 प्रतिशत बढ़कर 1254 करोड़ रुपये रही।
Author: JAN TV Editorial Team
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