इस हादसे में एक नाविक की मौत हो गई जबकि चार अन्य नाविक अब भी लापता हैं। उनका पता लगाने के लिए तलाश एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया गया है। नौसेना अधिकारियों ने बताया कि बोर्ड ऑफ इन्क्वायरी हादसे के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल करेगा और पता लगाएगा कि किन कारणों से 31 साल पुराना यह पोत डूबा। नौसेना के एक बयान में बताया गया है कि पोत रात करीब आठ बजे डूबा । यह पोत एक ‘‘नियमित’’ अभ्यास के दौरान बेड़े के पोतों से दागे गये टॉरपीडो इकट्ठे करने के नियमित मिशन पर था। उन्होंने बताया कि तभी इसके एक कंपार्टमेंट में पानी भरने का पता चला। नौसेना ने कहा, ‘बचाव अभियान के दौरान चालक दल के एक सदस्य की मृत्यु हो गयी और चार जवानों के लापता होने की रिपोर्ट है। 23 लोगों को क्षेत्र में भेजे गए तलाशी और बचाव पोतों ने सुरक्षित बचा लिया है।’ नौसेना के अधिकारियों ने कहा कि पानी भरना उस समय शुरू हुआ जब जहाज अभ्यास में इस्तेमाल नकली टॉरपीडो एकत्रित करके लौट रहा था। टॉरपीडो रिकवरी वेसल (टीआरवी) एक सहायक जहाज होता है जिसका इस्तेमाल बेड़े के जहाजों और पनडुब्ब्यिों से अभ्यास के दौरान दागे गये टॉरपीडो को एकत्रित करने के लिए किया जाता है। इस जहाज का निर्माण 1983 में गोवा शिपयार्ड द्वारा किया गया था और इसने पिछले 31 साल तक भारतीय नौसेना की सेवा की है। पिछले कुछ महीनों में नौसेना को ऐसे कई हादसों का सामना करना पड़ा है।
Author: JAN TV Editorial Team
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।